tha power of meditation

आखिर कार क्या है धर्म ? हमने धर्म को खंड खंड में क्यों बाट दिया है ? आज पूरी पृथ्वी पर तीन सौ से ज्यादा धर्म है ओर अधर्म अकेला है।। हमने इस अखंड पृथ्वी को जेस खंड खंड में बाट दिया है वैसे ही हमने धर्म को भी खंड खंड में बाट दिया है ।। धर्म हमारा मूल स्वभाव है। जैसे एक वृक्ष का मूल स्वभाव ओर धर्म है प्राण वायु देना ओर छाऊ देना धूप से बचना जेस एक फूल का स्वभाव है सुंगध देना। ओर चारो ओर देना  वैसे ही धर्म हमारा मूल स्वभाव है। परन्तु हमे यानी कि पूरी मनुष्य जाती को हमारे धर्म से विमुख कर दिया गया है ओर ये काम हमारे धर्म गुरु ओ ने अपने गोरख धंधे ओर दुकानों को चलने के लिए सारी मनुष्य जाती को भी धर्मो में ओर जाती ओ में बाट दिया है। ओर सारी मनुष्य जाति भेड़ की तरह इन धर्म गुरु ओ की रहा पर चल पड़ी है जो आज तक कहीं नहीं पोहची। कुछ अपवाद रूप थोड़े से लोग हुवे कबीर बुद्ध महावीर जीजस  जेस जो इन बांध को तोड़ कर निकल पड़े। ओर अपनी भीतर की नदी को जोड़ने के लिए सागर की ओर चल पड़े एक एक मनुष्य के भीतर वह प्रवाह बेहरहा है सिर्फ उसे सागर की दिशा की ओर मोड़ने की जरूरत है तो तोड़ दो सारे बांध ओर बेह जाने दो अपने आप को सागर की ओर।  अगर कोई ईश्वर भी उच्च नीच भेद भाव पाप पुण्य  की खोखली शिक्षा देता है तो इसे ईश्वर को भी मानने की कोई जरूरत नहीं है।  उत्तर जाव अपने भीतर। ओर पूछो अपने आप से सवाल के में कोन हूं। दिन में सिर्फ अधा घंटा सारे काम छोड़ कर बैठ जाव ओर पूछो।।  तुम्हारी संसो की हर ले के साथ में कोन हू जेस ही सांस भीतर जाए पूछो में कोन हू। थोड़ी ही दिनों में आप पाओगे जो आज तक नहीं हुआ। तुम शरीर नहीं हो तुम कुछ ओर हो। एसा महसूस होने लगेगा।। क्यों के हमारी सारी शिक्षा ही हमे हमारे धर्म गुरु ओ ने हिंसा नफरत ओर गरीबी की ओर लेजाने की दी है।। में अपने कुछ छोटे से प्रयास से चाहता हूं के आप सब आने वाले समय में। एक बेहतरीन जीवन ओर आनन्द का अनुभव कर सकते  है।। अगर आप के कोई प्रश्न है तो कमेंट बॉक्स में जरूर लिखे।  आज की बात यही समाप्त करते हुवे हम फिर एक कदम आगे बढ़ेंगे तीसरे चरण में।।

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